मन की कालिख…..

आज अकेले दिया जलाकर,घर में उजाला कर बैठे !मन की कालिख साफ़ नहीं की,तन उजियारा कर बैठे !! आज अकेले दिया जलाकर,घर में उजाला कर बैठे !मन की कालिख साफ़ नहीं की,तन उजियारा कर बैठे !! सुबह-शाम  प्रभु नाम की माला,मस्तक तिलक लगाना यूँ….मात-पिता की सुध बिसरा के,उनको यूँ ठुकराना क्यूँ ?? खुद की खातिर […]

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