दिल से….

तुम्हारे दिल की धड़कन को ,अगर हम सुन नहीं पाये।समझ लेना, हमारी शक़्ल में ,फिर हम नहीं आये।।*******************तुम्हारे दर्द – ए – उल्फ़त से ,नज़र जो नम न हो पायीं।वो आँखे गैर की होंगी ,ये आँसू कम  नहीं आये।।*******************मेरा अल्लाह तेरी रूह ,मेरा सजदा तेरी चाहत।मेरी हर नज़्म भी है तू ,तेरी यादें मेरी दावत।।*******************मेरी हर जुफ्तज़ू […]

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मन का संशय …

हालिया अनुभवों स्व अनुदित कविता की कुछ पंक्तियाँ ….. संदेह सहित है सब जग में ,संशय भय मेरे रग रग में !मन दुःख से तब भर जाता है ,अपनों के कांटे जब हों डग में !!जब सब ही हों सच्चे मन के ,मन भी सैम सुंदर हो तन के !जब झूठ फ़रेब से बचा रहूँ ,क्यूँ […]

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काला धन काली सरकार , काली सब करतूत, न जाने कब क्या कर बैठे, कांग्रेस का भूत…..

आदरणीय मित्रों एवं स्नेहीजन …..                                    पिछले तीन महीनों से कुछ नहीं लिख पाया और न ही ज्यादा समय ब्लॉग पर दे पाया , इसके लिए करजोर क्षमा ! देश में उभरे हालात एवं स्थितियों को ब्यक्त करती एक […]

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माँ बिन बालक …

मात – स्नेह – वंचन से आहत , मात – स्नेह की अविरल चाहत , पाले.. मन में नन्हां बालक , तड़प रहा जीवन में नाहक ! बिन माँ , बालक की जो दशा है , आखेटक की जाल में जैसे फंसा है , दिन – दिन रोता याद न जाती , मात – मिलन […]

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धोखा….

दीवानों की महफ़िल में , देखो हम भी आ ही गए !  ग़म भी हुआ हम हंसना भूले , आखिर धोखा खा ही गए !! प्रथम दिवस के प्रथम मिलन की , याद हमें जब आती है ! रोम रोम में लहर ख़ुशी की ,  मस्ती मन में छाती है !! साथ जियेंगे, साथ मरेंगे […]

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हैं सभी अपने …

सहनशील , सृजनशील… ..संघर्षशील नारी की ,  दुःख भरी दास्ताँ ! हो कोई भी रूप , सिर्फ धूप ही धूप ! हैं सभी अपने …. पर नहीं किसी को वास्ता ! नारी की दुःख भरी दास्ताँ !! कभी परिवार के लिए,  कभी समाज के लिए ! कभी कल के लिए…  ..तो कभी आज के लिए !  करती […]

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अब मैं बोलूँगा…

बस…बस !! अब मैं बोलूँगा   नहीं रोकूंगा खुद को  डरूँगा नहीं , लडूंगा ! अब अपनी बंद आँखें खोलूँगा !  हर्ज नहीं ग़र मारा जाऊंगा   चुप रहकर , रोज-रोज- मरने से तो बेहतर है !  किसी को मरते देख , किसी को मारते देख , आत्मचित्त , स्वार्थपूरित नेत्र  अब मैं खोलूँगा , […]

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आदमी….

रात अकेली नहीं होती , होते हैं ढेरों ख्वाब  अकेला होता है गर कोई , तो आदमी ! उजाले में चमक नहीं होती , चमकते हैं तारे  डूबता है गर कोई ,  तो आदमी ! झूठ , झूठा नहीं होता ,  होते है ढेरों सच  झूठा होता है गर कोई , तो आदमी ! भाव बहते […]

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प्रिय ….

स्नेहिल छुअन की अभिलाषा , मनमीत से मिलने की आशा , ले दूर तलक मैं आया हूँ , मैं प्रेम पुजारी हूँ प्यासा !! प्रिय के प्रति पूर्ण समर्पण है , जो कुछ मेरा सब अर्पण है , मैंने खुद को उनमें है पाया , प्रिय ही तो मेरा दर्पण है !! नख-शिख सौंदर्य समाया […]

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माटी के लाल…..

देखा मैंने आज जिसे , कहते माटी का लाल उसे  !! मानवता की रक्षा करता , ह्रदय हर्ष देकर दुःख हरता! निर्मल निश्छल निः स्वार्थ भाव से , जन जन की है सेवा करता ! कृषि कर्म में रत रहता , ना आती कोई चाल उसे ! सरल सहज जीवन जीता , कहते माटी का […]

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