अन्जान राहों पे चलते चलते , अनजाने में जाने कब , एक पथिक अनजाना हो गया ,, जब जाना ये मैंने तो , जाने क्यूँ दिल को , लगा कि सब बेगाना हो गया ,, चाहा है स्नेह आपका , इस कोशिश में आकर यहाँ , ऐसा लगा मानो मैं जाना पहचाना हो गया ………

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