जीवित होना मात्र,

लक्ष्य नहीं मेरा…
कुछ भले जज़बात,
भी तो चाहिए…

हजारों बंदिशों में,
जी रहा हूँ मैं अभी…
मर जाने के हालात,
यूँ न लाईये…

ज़माना है,
मेरा दुश्मन…
कि दुश्मन मैं,
जमाने का…

कोई बतला दे,
मुझको अंत…
इस अनचाहे,
फ़साने का…

कोशिश है मेरी,
अपना लें…
मुझको सब,
मेरे अपने…

हक़ीकत है नहीं,
कुछ भी…
पराये हो गए,
…….सपने !!!

3 thoughts to “हक़ीकत है नहीं, कुछ भी…

  • Sunil Kumar

    हकीक़त ही सही है खुबसूरत अहसास मुबारक हो

    Reply
  • S.N SHUKLA

    ब्लॉग पर आगमन और समर्थन प्रदान करने का आभार, धन्यवाद.

    बहुत सुन्दर रचना, सुन्दर भावाभिव्यक्ति , बधाई.

    Reply
  • Pratibha Verma

    हुत सुन्दर रचना…

    Reply

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