रात अकेली नहीं होती ,
होते हैं ढेरों ख्वाब 
अकेला होता है गर कोई ,
तो आदमी !
उजाले में चमक नहीं होती ,
चमकते हैं तारे 
डूबता है गर कोई , 
तो आदमी !
झूठ , झूठा नहीं होता , 
होते है ढेरों सच 
झूठा होता है गर कोई ,
तो आदमी !
भाव बहते नहीं हैं ,
होता है ठहराव 
बहता है गर कोई ,
तो आदमी ! 
प्रेम मैला नहीं होता ,
होता है पावन 
मैला होता है गर कोई ,
तो आदमी ! 
काम छोटा नहीं होता ,
करने पर निर्भर है 
छोटा होता है गर कोई ,
तो आदमी ! 
दोष किसका नहीं होता ?
होता हम सबका 
पर बचता  है गर कोई ,
तो आदमी !!

One thought to “आदमी….”

  • हल्ला बोल

    यदि आप हिन्दू है तो हिन्दू कहलाने में संकोच कैसा. अपने ही देश में कब तक अन्याय सहेंगे. क्या आपको नहीं लगता की हमारी चुप्पी को लोग हमारी कायरता मानते हैं. एक भी मुसलमान बताईये जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कहता हो. फिर हम ही क्यों..? सच लिखने और बोलने में संकोच कैसा. ?
    यदि आप भारत माँ के सच्चे सपूत है. धर्म का पालन करने वाले हिन्दू हैं तो
    आईये " हल्ला बोल" के समर्थक बनकर धर्म और देश की आवाज़ बुलंद कीजिये… ध्यान रखें धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले दूर ही रहे,
    अपने लेख को हिन्दुओ की आवाज़ बनायें.
    इस ब्लॉग के लेखक बनने के लिए. हमें इ-मेल करें.
    हमारा पता है…. hindukiawaz@gmail.com
    समय मिले तो इस पोस्ट को देखकर अपने विचार अवश्य दे

    देशभक्त हिन्दू ब्लोगरो का पहला साझा मंच – हल्ला बोल

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